बुधवार, 19 मई 2010

क्या गरीब आदमी नक्सली हो सकता है?


जो दो वक्त की रोटी (सोनिया अम्मा की कृपा से)बडी़ मुस्किल से जुटा पाता है।
जो अपने बच्चों को भुखे मरते देखता है।
जो जी तोड़ मेहनत करता है और बदले में गालियाँ खाता है।
उसके पास ए के -४७ कहाँ से आ सकता है?
देश में ७०% आबादी गरीब है अगर वो ए के -४७ उठा ले तो फिर अम्मा को इटली जाना पडे़गा।
कुछ दिनों पहले अरंधुती राय कथित बुद्धिजीवि नक्सलियों के साथ कई दिन गुजारकर आई व उनके दुख दर्द की बात करते हुए कह्ती है कि नक्सली भी आम आदमी हैं उन तक विकास नहीं पहुँच पाया इसलिए वे नक्सली बन गये।
तो धर्म निरपेक्ष लेखिका अरंधुती राय जी(धर्म निरपेक्ष होने में अपने बाप का क्या जाता है)अगर नक्सली विकास चाहते हैं तो वे सडक ,स्कूल इत्यादि क्यों उडा़ देते हैं?
विकास का मतलब ये है कि उन्हें ए के -४७ बाँटा जाए?